म्यांमार में सैनिक तख्तापलट के खिलाफ आवाज उठाने से आखिर क्यों पीछे हट रहे नस्लीय बागी गुट ?

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भारत ने आखिरकार म्यांमार में जारी हिंसा पर कहर बरपाया है। भारत ने म्यांमार में हिंसा की निंदा की है और “अधिकतम संयम” के लिए आग्रह किया है।

गौरतलब है कि जब पिछले एक फरवरी को तख्ता पलट हुआ, तब नस्लीय बागी गुटों के संगठन इथनिक आर्म्ड ऑर्गनाइजेशन (ईएओ) ने सैनिक शासन के खिलाफ बयान जारी किया था। उन्होंने नए शासन को ‘हत्यारा’ तक कहा था।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने ट्वीट किया कि “म्यांमार में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बंद बैठक में अपनी टिप्पणी में, मैंने ये बिंदु दिए: हिंसा की निंदा जनहानि का शोक अधिकतम संयम का आग्रह करें लोकतांत्रिक संक्रमण के लिए हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई आसियान के प्रयासों का स्वागत करते हैं “।

उसके बाद से कुछ नस्लीय गुटों ने सशस्त्र हमले किए हैं, कुछ ने केवल सख्त बयान जारी किए हैं, जबकि कुछ ने पूरी चुप्पी साधे रखी है। ऐसे में कई विश्लेषकों के लिए ये समझना मुश्किल हो गया है कि जब ये तमाम गुट म्यांमार की सेना को अपना दुश्मन नंबर एक मानते रहे हैं, तो वे ऐसे मौकों पर क्यों निष्क्रिय हैं, जब आम माहौल सेना के खिलाफ है?

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